युद्धविराम के बीच ड्रोन हमले, मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ा तनाव
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कुवैत और सऊदी अरब ने युद्धविराम के बावजूद ईरान समर्थित ड्रोन हमलों का आरोप लगाया, जिससे क्षेत्रीय तनाव फिर बढ़ गया।
इजरायल-लेबनान वार्ता की तैयारी, लेकिन हिजबुल्लाह और सीमा विवाद के कारण समाधान अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
मध्य पूर्व में हाल ही में घोषित दो सप्ताह के युद्धविराम के बावजूद तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता दिखाई दे रहा है। कुवैत और सऊदी अरब ने आरोप लगाया है कि ईरान और उसके सहयोगी समूहों ने ड्रोन हमले जारी रखे हैं, जिससे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने सरकारी समाचार एजेंसी के माध्यम से जारी बयान में कहा कि गुरुवार रात हुए ड्रोन हमलों में देश की कुछ महत्वपूर्ण सुविधाओं को निशाना बनाया गया। हालांकि हमलों से हुए नुकसान का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इसे गंभीर सुरक्षा चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। इस घटना ने अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता से पहले युद्धविराम की विश्वसनीयता पर भी असर डाला है।
उधर, सऊदी अरब ने भी हालिया हमलों को लेकर चिंता जताई है। सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार, एक महत्वपूर्ण ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा है। यह पाइपलाइन देश के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जाती है, क्योंकि इसके जरिए तेल को लाल सागर तक पहुंचाया जाता है और होरमुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम होती है।
इसी बीच, Benjamin Netanyahu ने लेबनान के साथ संभावित वार्ता की अनुमति देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इस वार्ता का उद्देश्य ईरान समर्थित हिजबुल्लाह को निरस्त्र करना और दोनों देशों के बीच स्थिरता स्थापित करना है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायल और लेबनान के बीच फिलहाल कोई युद्धविराम लागू नहीं है और सुरक्षा सुनिश्चित होने तक सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल और लेबनान के बीच बातचीत अगले सप्ताह वाशिंगटन में शुरू हो सकती है। लेकिन लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष, सीमा विवाद और हिजबुल्लाह की भूमिका के चलते किसी ठोस समझौते तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने युद्धविराम की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि ईरान होरमुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति को बाधित कर रहा है, जो समझौते का उल्लंघन है।
वहीं, ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने युद्धविराम को रणनीतिक कदम बताते हुए कहा कि यह ईरान की स्थिति को मजबूत करता है और इसे कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
हालांकि बड़े पैमाने पर हमले फिलहाल कम हुए हैं, लेकिन क्षेत्र में स्थिति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात पर जल्द नियंत्रण नहीं पाया गया, तो तनाव एक बार फिर बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है।